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हैदराबाद यूनिवर्सिटी परिसर के पास स्थित 400 एकड़ भूमि से पेड़ों को काटने पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई, दिए सख्त आदेश

Admin April 16, 2025 1 min read

नई दिल्ली
हैदराबाद यूनिवर्सिटी परिसर के पास स्थित 400 एकड़ भूमि से पेड़ों को काटने पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि यहां पर पूर्व की स्थिति को बहाल करना होगा। यह इलाका जंगल जैसा है और इसे हैदराबाद का फेफड़ा कहा जाता है। पिछले दिनों यहां औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए पेड़ों की कटाई शुरू की गई थी, जिसके विरोध में लोग उतर आए थे। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर हुआ था, जिसमें जंगल के कटने से पशु और पक्षी भाग रहे थे। यह मार्मिक वीडियो देखकर हर कोई परेशान था और मांग की जा रही थी कि पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए। ऐसे पेड़ों को खत्म नहीं करना चाहिए। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी अर्जी दाखिल हुई तो अदालत ने पुरानी स्थिति ही बहाल करने का आदेश दिया।

उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना सरकार से कहा कि आपको 100 एकड़ जमीन पर पूर्व की स्थिति बहाल करने के लिए योजना बनानी होगी। बेंच ने पेड़ों की कटाई में तेलंगाना सरकार की ‘जल्दबाजी’ पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया गया है हम उससे चिंतित हैं। बेंच ने कहा कि वीडियो में पशुओं को आश्रय की तलाश में भागते हुए देखकर स्तब्ध हैं। न्यायालय ने तेलंगाना से कहा, आप देखिए कि जंगली जानवरों की सुरक्षा कैसे की जाएगी। कोर्ट ने तेलंगाना के वन्यजीव वार्डन को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि यह चिंताजनक है कि इस तरह पेड़ों को काटा जा रहा है और पशु-पक्षी अपने आश्रय़ के लिए भाग रहे हैं।

बता दें कि हैदराबाद में यूनिवर्सिटी के पास स्थित कांचा गाचीबोवली इलाके में जंगल सरीखी 400 एकड़ भूमि है। इस इलाके में करीब 700 से अधिक प्रजातियों के पेड़ और पौधे हैं। इसके अलावा 200 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों का भी यह वन क्षेत्र आश्रय है। पिछले दिनों जब इस जंगल पर कुल्हाड़ी चली तो वन्य जीव प्रेमियों समेत आम नागरिकों ने भी आपत्ति जताई। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी इस पेड़ कटाई के वीडियो तेजी से वायरल हुए और हैदाराबाद समेत देश भर में गुस्सा देखा गया। दरअसल यहां तेलंगाना स्टेट इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन को जमीन आवंटित की गई थी। इसके खिलाफ छात्र और पर्यावरणविद मिलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। कॉरपोरेशन इस भूमि की नीलामी करके एक आईटी पार्क विकसित करना चाहता था।